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थावला मे रसोई और मुंडन कार्यक्रम

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आज़ थावला गए हम। ससुराल वाले हर साल माताजी की रसोई करते है। आज़ रसोई के साथ शैतान जी के बच्चे के जडूले भी थे। उनके परिवार मे दो और बच्चों के जडूले थे आज।  यहाँ घर से मम्मी पापा जी, राधिका, कमला बाई और प्रिंस बड़ी गाड़ी मे गए। मै ममता बाई कों लेकर बाइक पर गया।  वहाँ थावला मे परिवार वाले लोगो से मिला। पहरावनी मे मुझे चालीस रुपये और दो ड्रेस मिली।  मेनका जी और देव बेटा थावला ही रह गए, वो कल आएंगे। मेनका जी बहुत भाग दौड़ कर रही थी। दो मिनट बात कि तो मैंने कहा कि थोड़ा आराम कर ले, इतनी भागमभाग क्यों कर रही है। जिम्मेदारी मे भावुकता मिल जाती है, तो इसी तरह ताबड़तोड़ मेहनत होती है।  थावला मे आशाराम और उसकी फेमेली से भी मुलाक़ात हुईं, सुलझे हुए लोग है बहुत।  वापस आते समय बहुत सर्दी लगी, ममता बाई घर परिवार कि बातें करते हुए आ रही थी। जब हम नेगड़िया पुलिया पर आए तो हमने बहुत अद्धभुत दृश्य देखा।  पूर्व की तरफ चाँद की रौशनी नदी मे गिर रही थी। और पश्चिम मे ढलता हुआ सूरज अपनी अंतिम रौशनी से लालिमा बना रहा था। सूरज की रौशनी मे डार्क नेस थी, अजीब सा रहस्यमय वातावरण था। जबकि चाँद की ...

दिल्ली यात्रा

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इस साल तीन बार दिल्ली जाना हुआ। अभी छ तारीख कों इंदर भाई देवलेन और मै ट्रेन से दिल्ली गए. दीदी सुनीता बैंसला जी के बंगले पर जाना था हमें, यहाँ कर्नल बैंसला साहब की सुक्तियों पर आधारित किताब पर कुछ काम पेंडिंग था, इसी कारण हम दिल्ली गए थे। तीन दिन दिल्ली रहे, दीदी बहुत अच्छे से ख्याल रखती है. इस बार हम उनके ऑफिस भी जाकर आए. उनका ऑफिस जीवन से भरा हुआ है , ऑफिस के अंदर ही उन्होंने कोई पचास गमले रखे हुए है. सब के सब स्वस्थ और खिले हुए. ऐसा जीवंत ऑफिस मैंने कही नही देखा. अच्छी यात्रा रही. 

कैंटरव्यूल्ले गॉस्ट : ऑस्कर वाइल्ड, किताब पढ़ी आज़

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प्रिंस अपनी स्कूल की लाइब्रेरी से ये किताब लाया है। नीले कवर ने मुझे इस किताब की तरफ आकर्षित किया।  किताब खोली तो इंग्लिश थोड़ी टफ लगी, फिर मैंने इसकी समरी पढ़नी शुरू की, जों कि हर चेप्टर के पीछे लिखी हुईं थी।  शुरू मे मुझे लगा गॉस्ट स्टोरी है, लेकिन गॉस्ट स्टोरी कों सिलेबस मे शामिल क्यों करेगी सीबीएसई?  पढ़ा तो समझ मे आया कि अलग लेवल का मैसेज है स्टोरी मे। एक भूत है, जों परेशान करना चाहता है। लेकिन इस फेमेली का टेस्ट, लिविंग और अप्रोच एसी है कि भूत बेचारा इनसे छुपता फिर रहा है।  और अंत मे इस फेमेली कि एक लड़की भूत कों 'मोक्ष' दिलवा देती है।  हुमर, दया, प्रार्थना और गहरे मैसेज से भरी स्टोरी है।  शुक्रिया ऑस्कर वाइल्ड साहब, अच्छी किताब लिखी आपने। 

निकोलास डारवास की किताब

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पिछले दिनों स्टॉक मार्केट पर निकोलस डारवास की किताब पढ़ी है.  इस किताब मे डरवास की ट्रेडिंग जर्नी कों स्वयं उन्ही ने बयान किया है.  मैंने इस किताब की पहली रीडिंग से जों बातें सीखी और अब्जोर्ब की वो इस तरह है.  1. हर ट्रेडर शुरुआत मे गलती करता है. क्यूंकि वो ट्रेडिंग कों बाजी की तरह खेलता है. 2. ट्रेडिंग निरंतरता मांगती है. अगर आप निरंतर रहते है तो धीरे धीरे आप एक सेटअप बनाने लगते है, आपके अंदर ट्रेडिंग विकसित होने लगती है. 3. प्रॉफिट की यहाँ कोई सीमा नही है, कोई स्टॉक कितना ऊपर जायेगा कोई नही जानता है. इसलिय मुझे स्टॉक के भविष्य के बारे मे कोई अनुमान नही लगाना है. 4. स्टॉप लॉस छोटा हो, क्विक हो, सहज हो. तभी हम प्रॉफिटेबल सिस्टम बना पाते है. 5. अपने काम के लिए दिमाग़ मे जगह होनी चाहिये, एक जूनून होना चाहिये. डरवस दुनियाँ के किसी भी हिस्से मे रहे, अपनी कला का प्रदर्शन किया, लेकिन ट्रेडिंग कों लेकर हमेशा पेशन और जोश से भरे हुए रहे. 6. कोलाहल और भीड़ से दूर रहकर आप अपने सिस्टम और प्रॉफिट कों मजबूत कर पाते है. जैसा कि डारवास ने करके दिखाया है. 7. एक संवेदनशील कलाकार भी इस मार्केट...

सर्दियों की शुरुआत 2024

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ये 2024 का साल है. महीना है नवंबर का.  सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है. सुबह सुबह हर कोई ये बात दोहरा रहा है कि सर्दी आ गयी है.  गाँवो मे इस शुरुआत को 'भोली भोली सर्दी पड़ने लगी है' ऐसा कहते है. अखबार इसे 'गुलाबी ठंड' बोलते है. आज़ सुबह देवली से गोठड़ा आया बाइक पर तो मुझे दो बार बीच मे ढाबो पर रुकना पड़ा, एक श्री राम ढाबे देवली मे, और एक हिंडोली से पहले नारायण जी के ढाबे पर.  ठंड लग रही थी, जैकेट नही पहन कर आया. जैकेट लेनी पड़ेगी अब.  पिछली दफा कोटा से जैकेट खरीदा था. हल्के नीले शेड का जैकेट था. बहुत गंदा होता था. तीन चार बार पहनते ही मेल जम जाता था.  इस बार गहरे रंग का लूंगा. रेड टेप से लेने का विचार है. हल्का और किफायती होता है इस कम्पनी का जैकेट. दो अढ़ाई हजार तक मिल जाना चाहिये.  इन सर्दियों मे बच्चों के लिए गोंद के लड्डू बनवाने है. कुछ खाएंगे तो शरीर कों लगेगा.  प्रिंस और देव कों इस बार इक्कीस दिन के चेलेंज देकर आया हूं. प्रिंस के लिए डेली पांच एक्सरसाइज का सेट बताया है, जों उसे इक्कीस दिन लगातार करना है. और उन एक्सरसाइज का डेटा भी मेंटेन रखना है. ये इसलि...

बिजनेस के बारे मे मेरे अनुभव

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सन 2016 के सितंबर अक्टूबर से लेकर साल 2024 के अक्टूबर नवंबर तक मै बिजनेस मे शामिल रहा. बहुत अच्छी लर्निंग रही इन आठ सालो के दौरान।  कॉलेज एजुकेशन का बिजनेस था।  मेरे अनुभव इस तरह से रहे :  1. जब आप कोई बिजनेस शुरू करे, तब साझेदार के साथ बिजनेस मॉडल, बिजनेस एथिक्स, फायनेन्स कों पहले ही दिन तय कर लेना चाहिये।  2. बिजनेस एक साहसिक काम है, आपको इसे कितना बढ़ाना है, किस समय इसे विस्तार देना है। ये बातें स्पष्ट होनी चाहिये, टाइम लाइन से समझौता नही होना चाहिये।  3. बिजनेस मे आपसी निर्णय बहुत महत्वपूर्ण होते है। साझेदारो के निर्णय आपसी सहमति से होने चाहिए। डिकटेट निर्णय एक साझेदार कि महत्वकांक्षाओं के हवाले होकर बिजनेस कों डायल्यूट कर देते है।  4. बिजनेस का अहम पहलू ह्यूमन रिसोर्स होते है। आपके साथ और अधीनस्थ काम करने वाले लोगो की निष्ठा और ऊर्जा बिजनेस कों ग्रो करती है। हमेशा इन लोगो का ध्यान रखना चाहिये।  5. चाहे हम कम डिलीवर करे, लेकिन बेटर डिलीवर करे। डिलीवरी ही आपका प्रोडक्ट है। जों कि बेहतरीन होना चाहिये।  6. बिजनेस परसन कों सिर्फ ऑफिस मे नही बैठना च...

रिश्तें

बड़ा नाजुक शब्द है 'रिश्ते' लेकिन समझने के लिए आपको मजबूत दिमाग़ और कोमल हृदय की जरूरत होती है.  मेरा एक दोस्त था, कोई सात साल तक उससे बात होती थी, हम दोनों ने इन सात सालो मे जिंदगी की हर ऊंचाई और गिरावट कों साथ झेला, खूब हँसी मजाक करते थे. खूब चर्चाएं करते थे. चर्चाएं लोगो की , घटनाओं की और परिघटनाओं की.  हम दोनों ने बहुत सा समय साथ मे बिताया. उनकी वजह से मै जहरीले लोगो से दूर हुआ, जिंदगी कों  सादगी और शुचिता की नजर से देख पाया.  वें मजबूत शख्सियत वाले व्यक्ति थे, उनका चरित्र मजबूत था मेरी निगाहो मे.  फिर एक दिन समय ने हम दोनों कि दोस्ती से करवट ले ली.  मै उनसे इस वजह से नाराज हुआ कि वो मुझे रेस्पॉन्ड नही कर रहे थे. और जब मैंने नाराजगी जाहिर की तो वें वापस ही नही लौटे. उनके मन मे खुद कों साबित करने कि जुगत नही थी.  वें सोचते थे, कि मै सही हूं तो मुझे क्यों खुद कों स्पष्ट करना पड़े.  खैर, हमारी बात नही हुई लगभग छः महीने.  मैंने उनसे वापस बात करनी चाही, लेकिन वें रिश्ते कों जीने से मना कर चुके थे.  मैंने हर तरह से प्रयास किये, लगभग ग्यारह मह...

दीपावली 2024

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दीपावली निकल गयी। पुखराज और शुभम आ गए थे दीपावली पर, उनके आने से पहले ही उनके आने का मौसम शुरू हों जाता है।  घर मे रौनक़ रहती बन जाती है, दोनों ही बड़े प्यारे बच्चे है घर के. घर की वेल्यू समझते है.  इस बार कलर करवाया है घर का. सुंदर और स्वस्थ हों गया घर. कुल 1.35 लाख रुपया खर्च हुआ. लेकिन बढ़िया रंग हुआ.  9 नवंबर कों गुड्डू का जन्मदिन था, मै कोटा था, देर हों गयी, पहुंच नही पाया. अच्छा प्रोग्राम हुआ, सब घर वाले भोजन करने पधारे, बढ़िया लगा सबको.  एक बात और हुई, 7 तारीख कों नई गाड़ी ली पापाजी ने. टाटा पंच रिदम एडवेंचर ली है. मजबूत गाड़ी है, एवरेज भी 20-25 किलोमीटर प्रति लीटर पेट्रोल का है.  पहले बोलेरो थी, पापाजी काफी मिस कर रहे थे गाड़ी की जरूरत तो पड़ती ही है. दीपावली पर सब भाई साथ बैठे, बातें की. रणजीत पुखराज और मै राम ढाबे पर बैठे 6 नवंबर की तारीख कों. डेढ़ दो घंटे बातें हुई हमारी. रणजीत कों भी अच्छा लगा.  ये दीपावली अच्छी रही इस बार, सबने खुशियाँ मनाई. सब बड़े मेलजोल से रहे.  मै भी कॉलेज से फ्री हों गया इस दीपावली पर. अच्छा लग रहा है, फील फ्री की भावना है. अब ...

दिल्ली से किताबों की खरीददारी

दूसरी बार दिल्ली आना हुआ है। दीदी सुनीता बैंसला जी की वजह से ही दोनों बार दिल्ली आना हुआ।  पिछली बार मार्च -अप्रेल मे आया था, लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले।  दीदी को टोंक सवाई माधोपुर से लोकसभा का टिकट दिए जाने की चर्चा थी। फाइनल पेनल मे भी दीदी जी का नाम गया था।  समय की परियोजना मान कर ही मैंने अपने आप को दिलासा दिया कि इसी वजह से उनका टिकट नही हुआ। पता नही समय ने इनके भाग्य मे क्या लिख रखा है, मालूम नही भविष्य काल की क्या परियोजना है। हालांकि ये इस पद के लिए पूर्णतः क्वालीफाई करते है।  इस बार दिल्ली आया तो प्रभात प्रकाशन पर जाना हुआ। कर्नल साहब पर पुस्तक के सिलसिले मे।  बड़ा सुंदर पब्लिकेशन हाउस है ये।  प्रोफेशनल वातावरण है। आंगनतुको को चाय कॉफी का पूछते है ये लोग, और जोरी से चाय पिलाते है।  यहाँ के कॉर्डिंनेटर जगदीश जी बड़े ऊर्जावान और सक्रिय व्यक्ति लगे।  किताबों की सूची मांग कर मैंने तीन किताबें खरीदी : जंगल बुक , दस उपनिषद और नेपोलियन की आत्मकथा। एलिस इन वंडर लेंड विशेष तौर पर देव और प्रिंस के लिए ली है।  बिल देखा तो उसमे 40% का डिस्काउंट...

दिल्ली यात्रा

27 अक्टूबर को दिल्ली जाना हुआ।  दीपावली की छुट्टियां चल रही है, मै लगभग फ्री ही था।  दीदी सुनीता बैंसला जी से बात हुई तब उन्होंने दिल्ली आने के लिए कहा था, कर्नल साहब की किताब का काम अधूरा है तो दिल्ली आकर उसे पूरा कर लो।  27 तारीख की सुबह 6:15 की ट्रेन थी कोटा से। सुबह जल्दी उठकर हिंडोली गया बाइक पर, वहाँ से राजू जी को लेकर कोटा निकल गया। राजू जी के घर चाय पीने मे आधा घंटा खर्च हों गया। बहुत कोशिश की, लेकिन ट्रेन छूट गयी। एक मिनट का फासला रह गया था। टाइम की कीमत पता चली, जब पांच घंटे का रास्ता अब बस मे चौदह घंटे मे पूरा किया और पैसा भी चार-छ गुना लगा। कोटा से दिल्ली 250 रुपये का टिकट था ट्रेन मे। बस मे कुल 1400 रुपये खर्च हुए। खैर दिल्ली पहुँचा, दीदी और अजय जीजाजी के साथ इंदर भाई इतज़ार कर रहे थे।  दीदी का घर C1/16 बापा नगर मे है। सरकारी आवास है। दीदी ने बहुत खूबसूरती से मेंटेन कर रखा है घर को। कम से कम सामान दिखाई देता है। परिवार की तस्वीरें सजा रखी है, सोफे, डायनिंग टेबल साधारण मजबूत और साफ सुथरे।  दीदी को आधी चिंता तो उनके घर के पौधों और यहाँ रह रही बिल्लीयो ...

जिस स्त्री का पुरुष साथी कमजोर होता है, वो स्त्री भी कमजोर हों जाती है.

स्त्री और पुरुष हजार वर्षों से साथ रहते हुए आए हैं।  पति-पत्नी के तौर पर, पिता पुत्री के तौर पर, भाई बहन और कार्यस्थल पर साथियों के तौर पर।   पति-पत्नी का  रिश्ता इस संसार के सबसे अनूठे रिश्तो में से एक है, दो लोग एक सामाजिक स्वीकृति के तहत, जीवन भर साथ रहते हैं।   मेरा अनुभव रहा है कि संसार में कई स्त्रियां  अपने परिवार में पुरुषों से आगे निकल जाती है, आगे निकलना कोई बुरी बात नहीं है. लेकिन कोई अकेला ही निकल जाए आगे तो यह बड़ी समस्या की बात है.   ऐसी स्थिति में पुरुष कमजोर पड़ने लगता है, उसकी आर्थिक स्थिति सामाजिक स्थिति पर इस बात का गहरा प्रभाव पड़ता है.   इस अवस्था के इधर हम दूसरी अवस्था को भी देख ले जरा.  जिस स्त्री का पुरुष कमजोर पड़ने लगे, और स्त्री कहीं आगे नहीं बढ़ पाए, ऐसी स्त्री में सबसे ज्यादा भरोसा स्त्री का अपने जीवन के प्रति ही टूटा है.   समाज में शराबी है, जुआ खेलने वाले लोग हैं, गरीब किसान है, या दैनिक दिहाड़ी करने वाले गरीब लोग हैं। आप सोच कर देखिए उनकी स्त्रियों की क्या हालत है, उन्हें अपने ही परिवार ...

अपने आप जागने का अनुभव

आज 5:15 का अलार्म लगाया था। अलार्म 5:30 का हुआ फिर 5:45 का हुआ।   5:45 मुझे लगा, अब खुद को खुद ही उठ जाना चाहिए। हालांकि तबीयत थोड़ी सी नरम है। लेकिन सुबह उठकर चाय बनाना और पत्नी और बच्चों के लिए चाय पेश करना, इसका भी अपना ही मजा है।   चाय से फारिग होकर मै, सुबह की ताजी हवा का आनंद लेने के लिए साइकिल उठकर बाहर निकल पड़ा।   जब आप अपने आप किसी काम को करते हैं, तुम उनके अंदर भीतर ही भीतर संतुष्टि और आत्मसंबल का  अनुभव होता है।   इन दिनों में बहुत सारे काम स्वयं ही करना चाह रहा हूं।   जैसे स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग, यह मेरा अपना निजी अनुभव है, मेरी अपनी निजी यात्रा है। स्टॉक मार्केट के अंतर्गत में निजी रूप से बहुत सारी चीज सीख रहा हूं।  जैसे,  ट्रेडिंग में कोई सेटअप हो, वह सेटअप 5% ही कार्य करता है।   बाकी का काम आपकी अपनी सीख और समझ है। आपकी अपनी गुंजाइश है, कि आप कितनी गंभीरता और कितनी समझदारी से चीजों को देखते हैं।   मसलन,   आपको धैर्य रखना होता है, जब तक कि आपकी ट्रेड एग्जीक्यूट नहीं हो जाती ...

आज़ मुझे बुखार है

दीपावली के दिन है। भाग दौड़ तो रहती ही है, घर से कॉलेज कॉलेज से घर, और घर पर भी दो-चार इधर-उधर के काम।   मौसम एक  चुनाव का भी है, यहां देवली में उपचुनाव  की तारीख घोषित हो चुकी है। हम जा रहे हैं कि दीदी सुनीता बैसला जी को टिकट मिले, चुनाव लड़े और इस सीट को निकाले।   लेकिन यहां लोकल स्तर पर इतनी सारी गुटबाजी और दुरभीसन्धियां है कि, कब किसको टिकट मिल जाए, यह कहा नहीं जा सकता।  दीदी अपना पूरा प्रयास कर रही है, संगठन में उनकी पकड़  उनकी छवि की वजह से है, दोनों ही प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी उनका सम्मान करती है।  व्यक्ति स्वच्छ हो, साधारण तौर पर जमीन से जुड़ा हुआ हो, और वह जहां भी कम करें वहां  उसकी नेक नियति और अनुशासन झलके तो छवि अपने आप ही स्वच्छ और निर्मल होती चली जाती है। और इस स्वच्छता का प्रभाव दूर तक पड़ता है, ऐसा मैंने दीदी के व्यक्तित्व में  देखा है।   यहां ग्राउंड पर भी जितने लोगों से मिलते हैं, वह सारे लोग  दीदी की तारीफ करते हुए नहीं थकते है। दीदी बैसला का उठना बैठना चलना, बातों को ध्यान से सुनना और रेस्पॉन्ड करना...

दीपावली की सफाई

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घर में दीपावली की सफाई चल रही है।   कोई 7 साल बाद घर में पेंट हो रहा है। पेंट को लेकर मेरा कोई विचार नहीं था, लेकिन भाई पुखराज ने  यह बीड़ा उठा लिया, और बार बार पुश करके ये काम शुरू करवा दिया।  वो हैदराबाद रहता है, लेकिन घर का छोटा और समझदार बच्चा है, तो उसकी बात को हर कोई सीरियस लेता है।  सफाई के माहौल मे जब सामान बिखरा होता है, तब घर की स्त्रियों के लिए बड़ी चुनौती होती है कि आखिर दाना पानी कैसे बनाये, बच्चों को पढ़ने कहाँ बैठाये। बच्चे भी मजे करते है, छोटी छोटी चीजों से खेलते कूदते, क़भी टूशन स्किप करते है, तो क़भी टीवी चला कर घंटो तक बैठे रहते है।  एक बात तो है पत्नी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका मे होती है, ये सफाई के दिनों मे ही मालूम पड़ता है। आदमी तो ढोलते ढोलते भी खुद को मेहनती ही जताता है, जाकिर ( कॉमेडियन ) सही कहता है, इतना तो इस दुनियाँ मे काम ही नही है जितना मर्द लोग बताते है ) 

नियमित व्यायाम नही करने से वजन क्यों बढ़ता है?

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नियमित व्यायाम की कमी से वजन बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं: 1. _चयापचय दर में कमी_: नियमित व्यायाम से चयापचय दर बढ़ती है, जिससे शरीर अधिक कैलोरी जलाता है। व्यायाम की कमी से चयापचय दर धीमी हो जाती है, जिससे वजन बढ़ता है। 2. _मांसपेशियों की कमजोरी_: नियमित व्यायाम से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जो शरीर को अधिक कैलोरी जलाने में मदद करती हैं। व्यायाम की कमी से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे वजन बढ़ता है। 3. _लचीलेपन में कमी_: नियमित व्यायाम से शरीर की लचीलापन बढ़ती है, जिससे शरीर अधिक कैलोरी जलाता है। व्यायाम की कमी से लचीलापन कम हो जाता है, जिससे वजन बढ़ता है। 4. _तनाव में वृद्धि_: नियमित व्यायाम से तनाव कम होता है, जो वजन बढ़ने का एक प्रमुख कारण है। व्यायाम की कमी से तनाव बढ़ता है, जिससे वजन बढ़ता है। 5. _नींद की कमी_: नियमित व्यायाम से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है, जो वजन नियंत्रण में मदद करता है। व्यायाम की कमी से नींद की कमी हो सकती है, जिससे वजन बढ़ता है। नियमित व्यायाम की कमी से वजन बढ़ने से बचने के लिए, आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए: 1. _नियमित व्यायाम करें_:...

हार्मोन असंतुलन से वजन कैसे बढ़ता है?

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हार्मोनल असंतुलन वजन बढ़ने का एक प्रमुख कारण हो सकता है। हार्मोन हमारे शरीर में विभिन्न कार्यों को नियंत्रित करते हैं, जिनमें वजन भी शामिल है। जब हार्मोन के स्तर में असंतुलन होता है, तो यह वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। हार्मोनल असंतुलन के कारण वजन बढ़ने के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं: 1. _थायराइड हार्मोन_: थायराइड हार्मोन हमारे शरीर की चयापचय दर को नियंत्रित करता है। जब थायराइड हार्मोन के स्तर में कमी होती है, तो यह वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। 2. _इंसुलिन हार्मोन_: इंसुलिन हार्मोन हमारे शरीर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है। जब इंसुलिन हार्मोन के स्तर में असंतुलन होता है, तो यह वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। 3. _कोर्टिसोल हार्मोन_: कोर्टिसोल हार्मोन हमारे शरीर में तनाव के समय जारी होता है। जब कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर में वृद्धि होती है, तो यह वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। 4. _लेप्टिन हार्मोन_: लेप्टिन हार्मोन हमारे शरीर में भूख और तृप्ति को नियंत्रित करता है। जब लेप्टिन हार्मोन के स्तर में कमी होती है, तो यह वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। हार्मोनल असंतुलन के कारण वजन बढ़ने से...

वजन बढ़ने के क्या क्या कारण है, बताइए?

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वजन बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं: 1. _अस्वस्थ आहार_: अस्वस्थ आहार जैसे कि जंक फूड, फास्ट फूड, और मीठे पेय पदार्थ वजन बढ़ने का कारण बन सकते हैं। 2. _नियमित व्यायाम की कमी_: नियमित व्यायाम न करना वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। 3. _तनाव_: तनाव वजन बढ़ने का कारण बन सकता है, क्योंकि तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाता है, जो वजन बढ़ने में योगदान करता है। 4. _पर्याप्त नींद की कमी_: पर्याप्त नींद न लेना वजन बढ़ने का कारण बन सकता है, क्योंकि नींद की कमी हार्मोन लेप्टिन के स्तर को कम करती है, जो वजन कम करने में मदद करता है। 5. _हार्मोनल असंतुलन_: हार्मोनल असंतुलन वजन बढ़ने का कारण बन सकता है, खासकर महिलाओं में। 6. _वंशानुगत कारण_: वंशानुगत कारण भी वजन बढ़ने का कारण बन सकते हैं। 7. _चिकित्सा स्थितियाँ_: कुछ चिकित्सा स्थितियाँ जैसे कि हाइपोथायरायडिज्म, कुशिंग सिंड्रोम, और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम वजन बढ़ने का कारण बन सकती हैं। 8. _दवाएँ_: कुछ दवाएँ जैसे कि स्टेरॉयड और एंटीडिप्रेसेंट वजन बढ़ने का कारण बन सकती हैं। इन कारणों को समझने से आप अपने वजन को न...

पंचकर्म से वजन कैसे घटा सकते है?

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पंचकर्म एक आयुर्वेदिक उपचार है जो वजन घटाने में मदद कर सकता है। पंचकर्म में पांच प्रक्रियाएं शामिल हैं जो व्यक्ति के शरीर और मन को स्वस्थ बनाने में मदद करती हैं: 1. _वमन_: वमन एक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकाला जाता है। यह प्रक्रिया वजन घटाने में मदद कर सकती है। 2. _विरेचन_: विरेचन एक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकाला जाता है। यह प्रक्रिया वजन घटाने में मदद कर सकती है। 3. _बस्ती_: बस्ती एक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के शरीर में औषधीय तेल या द्रव्य को डाला जाता है। यह प्रक्रिया वजन घटाने में मदद कर सकती है। 4. _नस्य_: नस्य एक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के नाक में औषधीय तेल या द्रव्य को डाला जाता है। यह प्रक्रिया वजन घटाने में मदद कर सकती है। 5. _रक्त मोक्षण_: रक्त मोक्षण एक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के शरीर से विषाक्त रक्त को निकाला जाता है। यह प्रक्रिया वजन घटाने में मदद कर सकती है। पंचकर्म से वजन घटाने के लिए, आपको एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए जो आपको उचित उपचार और आहार योजना प्रदान कर सकता है। पंचकर्म...

आयुर्वेद से वजन घट सकता है क्या?

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आयुर्वेद वजन घटाने में मददगार हो सकता है, क्योंकि यह प्राकृतिक और स्वस्थ तरीकों पर आधारित है। आयुर्वेद में वजन घटाने के लिए कई उपाय हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं: 1. _पंचकर्म_: पंचकर्म एक आयुर्वेदिक उपचार है जो वजन घटाने में मदद करता है। 2. _आहार-विहार_: आयुर्वेद में आहार-विहार का महत्व है, जिसमें स्वस्थ आहार और जीवनशैली को अपनाना शामिल है। 3. _योग और ध्यान_: योग और ध्यान वजन घटाने में मदद करते हैं और तनाव को कम करते हैं। 4. _हर्बल दवाएं_: आयुर्वेद में कई हर्बल दवाएं हैं जो वजन घटाने में मदद करती हैं। 5. _दिनचर्या_: आयुर्वेद में दिनचर्या का महत्व है, जिसमें सुबह उठना, शाम को सोना और दिन में व्यायाम करना शामिल है। आयुर्वेद वजन घटाने में मददगार हो सकता है, क्योंकि यह प्राकृतिक और स्वस्थ तरीकों पर आधारित है। आयुर्वेद में वजन घटाने के लिए कई उपाय हैं, जो व्यक्ति के शरीर और मन को स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं। आयुर्वेद के फायदे: 1. _प्राकृतिक उपाय_: आयुर्वेद प्राकृतिक उपायों पर आधारित है, जो व्यक्ति के शरीर और मन को स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं। 2. _स्थायी परिणाम_: आयुर्वेद स्थायी परिणा...

वजन घटाने के लिए नेचुरल तरीका बेहतर है या दवा बेहतर है?

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वजन घटाने के लिए नेचुरल तरीका दवा लेने से बेहतर है। नेचुरल तरीके से वजन घटाने के कुछ फायदे इस प्रकार हैं: 1. _स्थायी परिणाम_: नेचुरल तरीके से वजन घटाने से स्थायी परिणाम मिलते हैं। 2. _स्वस्थ जीवनशैली_: नेचुरल तरीके से वजन घटाने से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मदद मिलती है। 3. _कोई दुष्प्रभाव नहीं_: नेचुरल तरीके से वजन घटाने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। 4. _आर्थिक रूप से फायदेमंद_: नेचुरल तरीके से वजन घटाने से आर्थिक रूप से फायदेमंद होता है। दवा लेने से वजन घटाने के कुछ नुकसान इस प्रकार हैं: 1. _दुष्प्रभाव_: दवा लेने से दुष्प्रभाव हो सकते हैं। 2. _निर्भरता_: दवा लेने से निर्भरता हो सकती है। 3. _महंगा_: दवा लेना महंगा हो सकता है। 4. _अस्थायी परिणाम_: दवा लेने से अस्थायी परिणाम मिलते हैं। इसलिए, वजन घटाने के लिए नेचुरल तरीका दवा लेने से बेहतर है।