निकोलास डारवास की किताब
पिछले दिनों स्टॉक मार्केट पर निकोलस डारवास की किताब पढ़ी है.
इस किताब मे डरवास की ट्रेडिंग जर्नी कों स्वयं उन्ही ने बयान किया है.
मैंने इस किताब की पहली रीडिंग से जों बातें सीखी और अब्जोर्ब की वो इस तरह है.
1. हर ट्रेडर शुरुआत मे गलती करता है. क्यूंकि वो ट्रेडिंग कों बाजी की तरह खेलता है.
2. ट्रेडिंग निरंतरता मांगती है. अगर आप निरंतर रहते है तो धीरे धीरे आप एक सेटअप बनाने लगते है, आपके अंदर ट्रेडिंग विकसित होने लगती है.
3. प्रॉफिट की यहाँ कोई सीमा नही है, कोई स्टॉक कितना ऊपर जायेगा कोई नही जानता है. इसलिय मुझे स्टॉक के भविष्य के बारे मे कोई अनुमान नही लगाना है.
4. स्टॉप लॉस छोटा हो, क्विक हो, सहज हो. तभी हम प्रॉफिटेबल सिस्टम बना पाते है.
5. अपने काम के लिए दिमाग़ मे जगह होनी चाहिये, एक जूनून होना चाहिये. डरवस दुनियाँ के किसी भी हिस्से मे रहे, अपनी कला का प्रदर्शन किया, लेकिन ट्रेडिंग कों लेकर हमेशा पेशन और जोश से भरे हुए रहे.
6. कोलाहल और भीड़ से दूर रहकर आप अपने सिस्टम और प्रॉफिट कों मजबूत कर पाते है. जैसा कि डारवास ने करके दिखाया है.
7. एक संवेदनशील कलाकार भी इस मार्केट मे बेहतर काम कर सकता है. बिजनेस का मतलब कम धंधा नही होता है, चालाकी चुस्ती नही होता है बिजनेस का मतलब होता है अपने काम कों मन से करते रहना.
8. हर box ब्रेक आउट पर डरवस ने क्वांटिटी ऐड कि, ऐसे ही उन्होंने over ट्रेडिंग कंट्रोल किया. बढ़ते हुए स्टॉक पर इन्वेस्ट और रिइन्वेस्ट किया. ये चीज उन्हें बाकी ट्रेडर्स से बेटर बनाती है.
9.अच्छी किताब है. इसे मै बार बार पढूँगा.
ये लेख मै वृन्दावन के होटल के कमरे से लिख रहा हूं. यहाँ हम लोग घूमने आएं थे. बिट्टू भाई कि फेमेली, रवि जी कि फीमेली के साथ आया हूं. बच्चों के साथ आना था मुझे, लेकिन उन्हें लेकर आऊंगा अगली दफा. बहुत मिस कर रहा हूं बच्चों कों. उनकी माँ कों.
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