अपने आप जागने का अनुभव
आज 5:15 का अलार्म लगाया था। अलार्म 5:30 का हुआ फिर 5:45 का हुआ।
5:45 मुझे लगा, अब खुद को खुद ही उठ जाना चाहिए। हालांकि तबीयत थोड़ी सी नरम है। लेकिन सुबह उठकर चाय बनाना और पत्नी और बच्चों के लिए चाय पेश करना, इसका भी अपना ही मजा है।
चाय से फारिग होकर मै, सुबह की ताजी हवा का आनंद लेने के लिए साइकिल उठकर बाहर निकल पड़ा।
जब आप अपने आप किसी काम को करते हैं, तुम उनके अंदर भीतर ही भीतर संतुष्टि और आत्मसंबल का अनुभव होता है।
इन दिनों में बहुत सारे काम स्वयं ही करना चाह रहा हूं।
जैसे स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग, यह मेरा अपना निजी अनुभव है, मेरी अपनी निजी यात्रा है। स्टॉक मार्केट के अंतर्गत में निजी रूप से बहुत सारी चीज सीख रहा हूं।
जैसे,
ट्रेडिंग में कोई सेटअप हो, वह सेटअप 5% ही कार्य करता है।
बाकी का काम आपकी अपनी सीख और समझ है। आपकी अपनी गुंजाइश है, कि आप कितनी गंभीरता और कितनी समझदारी से चीजों को देखते हैं।
मसलन,
आपको धैर्य रखना होता है, जब तक कि आपकी ट्रेड एग्जीक्यूट नहीं हो जाती है। अगर प्राइस एक्शन कहीं फस गया है, मोमेंट बहुत कंजर्व हो गया है, तब भी आपको धीरज बनाए रखने की जरूरत होती है।
दूसरी बात मैंने यह सीखी, की बिजनेस में आपको एक महीना दो महीना या 1 साल का लक्ष्य लेकर नहीं चलना होता है। जबकि आपको एक बहुत दूरगामी विजन के साथ काम करना पड़ता है। इसका कतई यह अर्थ नहीं है कि हम शुरुआत में लॉस करते चले जाएं, और प्रॉफिट की आस में 8 साल 10 साल का इंतजार करें। इसका सीधा सा मतलब है कि आपको दैनिक तौर पर रोज छोटे-छोटे कदमों के साथ आगे बढ़ना पड़ता है। प्रॉफिट और लॉस को मैनेज करना होता है, और बारीक चीजों को ध्यान में रखना पड़ता है।
पहले में ऑप्शन ट्रेडर था। 5 मिनट और 15 मिनट की कैंडल पर दिन भर बैठा रहता था। और यकीन मानिए एक दिन की ट्रेड्स में, मेरा अच्छा खासा लॉस हुआ करता था। ऐसा कोई सप्ताह नहीं था ऐसा कोई महीना नहीं था जब मैं लॉस नहीं किया हूं। महीना ही लॉस में क्लोज होता था.
स्विंग ट्रेडिंग में ऐसा नहीं है। पिछले 5 6 महीने से हर महीना ग्रीन ही क्लोज हुआ है। यह धीरज का प्रतिफल है, संतोष और समझदारी का प्रतिफल है।
कह रहा हूं ना, जब आप अपने आप से किसी काम को करने लगते हैं तो आप उसमें पूरी तरह डूब जाते हैं, उसे काम के साथ आप बहने लगते हैं।
यह बात तो मुझे समझ में आ गई है, अनुशासन की बिना कुछ भी नहीं हो सकता, अनुशासन की मांग आपके हेल्थ में, आपसे रिलेशन में, बिजनेस और दुनियादारी में रहती है।
पिछले 5-6 सालों में जो समय अनुशासित रहने का था, अपने आप से उठकर काम करने का था। वह समय यूं ही बीत गया, बदले में हेल्थ और माइंडसेट ले गया।
जिंदगी में जब जागो तभी सवेरा कहा जाता है, मुझे अपने आप से उम्मीद है कि मैं अपनी हेल्थ को ठीक कर लूंगा, अपनी टाइमिंग और डिसिप्लिन को मैनेज कर लूंगा।
जब हम अपने आप से काम करने की अपने आप से निर्णय लेने की अवस्था में आ जाते हैं, तब हमें अपनी बहुत सारी कमजोरी अपनी बहुत सारी नाकामियां अपनी बहुत सारी समस्याएं सामने आती है, इन सभी को सॉर्ट आउट करना ही तो आगे बढ़ने का ख्याल है। एक उम्दा ख्याल।
चलिए नमस्कार कल मिलते हैं।
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