थावला मे रसोई और मुंडन कार्यक्रम
आज़ थावला गए हम। ससुराल वाले हर साल माताजी की रसोई करते है। आज़ रसोई के साथ शैतान जी के बच्चे के जडूले भी थे। उनके परिवार मे दो और बच्चों के जडूले थे आज।
यहाँ घर से मम्मी पापा जी, राधिका, कमला बाई और प्रिंस बड़ी गाड़ी मे गए। मै ममता बाई कों लेकर बाइक पर गया।
वहाँ थावला मे परिवार वाले लोगो से मिला। पहरावनी मे मुझे चालीस रुपये और दो ड्रेस मिली।
मेनका जी और देव बेटा थावला ही रह गए, वो कल आएंगे।
मेनका जी बहुत भाग दौड़ कर रही थी। दो मिनट बात कि तो मैंने कहा कि थोड़ा आराम कर ले, इतनी भागमभाग क्यों कर रही है। जिम्मेदारी मे भावुकता मिल जाती है, तो इसी तरह ताबड़तोड़ मेहनत होती है।
थावला मे आशाराम और उसकी फेमेली से भी मुलाक़ात हुईं, सुलझे हुए लोग है बहुत।
वापस आते समय बहुत सर्दी लगी, ममता बाई घर परिवार कि बातें करते हुए आ रही थी। जब हम नेगड़िया पुलिया पर आए तो हमने बहुत अद्धभुत दृश्य देखा।
पूर्व की तरफ चाँद की रौशनी नदी मे गिर रही थी। और पश्चिम मे ढलता हुआ सूरज अपनी अंतिम रौशनी से लालिमा बना रहा था। सूरज की रौशनी मे डार्क नेस थी, अजीब सा रहस्यमय वातावरण था। जबकि चाँद की रौशनी पानी पर उजाला बिखेर रही थी। अद्भुत ताजगी थी।
ममता बाई और हमने दृश्य कों देखकर सुखी अनुभव किया। क्या गजब का दृश्य था, सूरज और चाँद का।
अच्छा दिन रहा वाकई।
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