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अक्टूबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दिल्ली से किताबों की खरीददारी

दूसरी बार दिल्ली आना हुआ है। दीदी सुनीता बैंसला जी की वजह से ही दोनों बार दिल्ली आना हुआ।  पिछली बार मार्च -अप्रेल मे आया था, लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले।  दीदी को टोंक सवाई माधोपुर से लोकसभा का टिकट दिए जाने की चर्चा थी। फाइनल पेनल मे भी दीदी जी का नाम गया था।  समय की परियोजना मान कर ही मैंने अपने आप को दिलासा दिया कि इसी वजह से उनका टिकट नही हुआ। पता नही समय ने इनके भाग्य मे क्या लिख रखा है, मालूम नही भविष्य काल की क्या परियोजना है। हालांकि ये इस पद के लिए पूर्णतः क्वालीफाई करते है।  इस बार दिल्ली आया तो प्रभात प्रकाशन पर जाना हुआ। कर्नल साहब पर पुस्तक के सिलसिले मे।  बड़ा सुंदर पब्लिकेशन हाउस है ये।  प्रोफेशनल वातावरण है। आंगनतुको को चाय कॉफी का पूछते है ये लोग, और जोरी से चाय पिलाते है।  यहाँ के कॉर्डिंनेटर जगदीश जी बड़े ऊर्जावान और सक्रिय व्यक्ति लगे।  किताबों की सूची मांग कर मैंने तीन किताबें खरीदी : जंगल बुक , दस उपनिषद और नेपोलियन की आत्मकथा। एलिस इन वंडर लेंड विशेष तौर पर देव और प्रिंस के लिए ली है।  बिल देखा तो उसमे 40% का डिस्काउंट...

दिल्ली यात्रा

27 अक्टूबर को दिल्ली जाना हुआ।  दीपावली की छुट्टियां चल रही है, मै लगभग फ्री ही था।  दीदी सुनीता बैंसला जी से बात हुई तब उन्होंने दिल्ली आने के लिए कहा था, कर्नल साहब की किताब का काम अधूरा है तो दिल्ली आकर उसे पूरा कर लो।  27 तारीख की सुबह 6:15 की ट्रेन थी कोटा से। सुबह जल्दी उठकर हिंडोली गया बाइक पर, वहाँ से राजू जी को लेकर कोटा निकल गया। राजू जी के घर चाय पीने मे आधा घंटा खर्च हों गया। बहुत कोशिश की, लेकिन ट्रेन छूट गयी। एक मिनट का फासला रह गया था। टाइम की कीमत पता चली, जब पांच घंटे का रास्ता अब बस मे चौदह घंटे मे पूरा किया और पैसा भी चार-छ गुना लगा। कोटा से दिल्ली 250 रुपये का टिकट था ट्रेन मे। बस मे कुल 1400 रुपये खर्च हुए। खैर दिल्ली पहुँचा, दीदी और अजय जीजाजी के साथ इंदर भाई इतज़ार कर रहे थे।  दीदी का घर C1/16 बापा नगर मे है। सरकारी आवास है। दीदी ने बहुत खूबसूरती से मेंटेन कर रखा है घर को। कम से कम सामान दिखाई देता है। परिवार की तस्वीरें सजा रखी है, सोफे, डायनिंग टेबल साधारण मजबूत और साफ सुथरे।  दीदी को आधी चिंता तो उनके घर के पौधों और यहाँ रह रही बिल्लीयो ...

जिस स्त्री का पुरुष साथी कमजोर होता है, वो स्त्री भी कमजोर हों जाती है.

स्त्री और पुरुष हजार वर्षों से साथ रहते हुए आए हैं।  पति-पत्नी के तौर पर, पिता पुत्री के तौर पर, भाई बहन और कार्यस्थल पर साथियों के तौर पर।   पति-पत्नी का  रिश्ता इस संसार के सबसे अनूठे रिश्तो में से एक है, दो लोग एक सामाजिक स्वीकृति के तहत, जीवन भर साथ रहते हैं।   मेरा अनुभव रहा है कि संसार में कई स्त्रियां  अपने परिवार में पुरुषों से आगे निकल जाती है, आगे निकलना कोई बुरी बात नहीं है. लेकिन कोई अकेला ही निकल जाए आगे तो यह बड़ी समस्या की बात है.   ऐसी स्थिति में पुरुष कमजोर पड़ने लगता है, उसकी आर्थिक स्थिति सामाजिक स्थिति पर इस बात का गहरा प्रभाव पड़ता है.   इस अवस्था के इधर हम दूसरी अवस्था को भी देख ले जरा.  जिस स्त्री का पुरुष कमजोर पड़ने लगे, और स्त्री कहीं आगे नहीं बढ़ पाए, ऐसी स्त्री में सबसे ज्यादा भरोसा स्त्री का अपने जीवन के प्रति ही टूटा है.   समाज में शराबी है, जुआ खेलने वाले लोग हैं, गरीब किसान है, या दैनिक दिहाड़ी करने वाले गरीब लोग हैं। आप सोच कर देखिए उनकी स्त्रियों की क्या हालत है, उन्हें अपने ही परिवार ...

अपने आप जागने का अनुभव

आज 5:15 का अलार्म लगाया था। अलार्म 5:30 का हुआ फिर 5:45 का हुआ।   5:45 मुझे लगा, अब खुद को खुद ही उठ जाना चाहिए। हालांकि तबीयत थोड़ी सी नरम है। लेकिन सुबह उठकर चाय बनाना और पत्नी और बच्चों के लिए चाय पेश करना, इसका भी अपना ही मजा है।   चाय से फारिग होकर मै, सुबह की ताजी हवा का आनंद लेने के लिए साइकिल उठकर बाहर निकल पड़ा।   जब आप अपने आप किसी काम को करते हैं, तुम उनके अंदर भीतर ही भीतर संतुष्टि और आत्मसंबल का  अनुभव होता है।   इन दिनों में बहुत सारे काम स्वयं ही करना चाह रहा हूं।   जैसे स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग, यह मेरा अपना निजी अनुभव है, मेरी अपनी निजी यात्रा है। स्टॉक मार्केट के अंतर्गत में निजी रूप से बहुत सारी चीज सीख रहा हूं।  जैसे,  ट्रेडिंग में कोई सेटअप हो, वह सेटअप 5% ही कार्य करता है।   बाकी का काम आपकी अपनी सीख और समझ है। आपकी अपनी गुंजाइश है, कि आप कितनी गंभीरता और कितनी समझदारी से चीजों को देखते हैं।   मसलन,   आपको धैर्य रखना होता है, जब तक कि आपकी ट्रेड एग्जीक्यूट नहीं हो जाती ...

आज़ मुझे बुखार है

दीपावली के दिन है। भाग दौड़ तो रहती ही है, घर से कॉलेज कॉलेज से घर, और घर पर भी दो-चार इधर-उधर के काम।   मौसम एक  चुनाव का भी है, यहां देवली में उपचुनाव  की तारीख घोषित हो चुकी है। हम जा रहे हैं कि दीदी सुनीता बैसला जी को टिकट मिले, चुनाव लड़े और इस सीट को निकाले।   लेकिन यहां लोकल स्तर पर इतनी सारी गुटबाजी और दुरभीसन्धियां है कि, कब किसको टिकट मिल जाए, यह कहा नहीं जा सकता।  दीदी अपना पूरा प्रयास कर रही है, संगठन में उनकी पकड़  उनकी छवि की वजह से है, दोनों ही प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी उनका सम्मान करती है।  व्यक्ति स्वच्छ हो, साधारण तौर पर जमीन से जुड़ा हुआ हो, और वह जहां भी कम करें वहां  उसकी नेक नियति और अनुशासन झलके तो छवि अपने आप ही स्वच्छ और निर्मल होती चली जाती है। और इस स्वच्छता का प्रभाव दूर तक पड़ता है, ऐसा मैंने दीदी के व्यक्तित्व में  देखा है।   यहां ग्राउंड पर भी जितने लोगों से मिलते हैं, वह सारे लोग  दीदी की तारीफ करते हुए नहीं थकते है। दीदी बैसला का उठना बैठना चलना, बातों को ध्यान से सुनना और रेस्पॉन्ड करना...

दीपावली की सफाई

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घर में दीपावली की सफाई चल रही है।   कोई 7 साल बाद घर में पेंट हो रहा है। पेंट को लेकर मेरा कोई विचार नहीं था, लेकिन भाई पुखराज ने  यह बीड़ा उठा लिया, और बार बार पुश करके ये काम शुरू करवा दिया।  वो हैदराबाद रहता है, लेकिन घर का छोटा और समझदार बच्चा है, तो उसकी बात को हर कोई सीरियस लेता है।  सफाई के माहौल मे जब सामान बिखरा होता है, तब घर की स्त्रियों के लिए बड़ी चुनौती होती है कि आखिर दाना पानी कैसे बनाये, बच्चों को पढ़ने कहाँ बैठाये। बच्चे भी मजे करते है, छोटी छोटी चीजों से खेलते कूदते, क़भी टूशन स्किप करते है, तो क़भी टीवी चला कर घंटो तक बैठे रहते है।  एक बात तो है पत्नी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका मे होती है, ये सफाई के दिनों मे ही मालूम पड़ता है। आदमी तो ढोलते ढोलते भी खुद को मेहनती ही जताता है, जाकिर ( कॉमेडियन ) सही कहता है, इतना तो इस दुनियाँ मे काम ही नही है जितना मर्द लोग बताते है )