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थावला मे रसोई और मुंडन कार्यक्रम

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आज़ थावला गए हम। ससुराल वाले हर साल माताजी की रसोई करते है। आज़ रसोई के साथ शैतान जी के बच्चे के जडूले भी थे। उनके परिवार मे दो और बच्चों के जडूले थे आज।  यहाँ घर से मम्मी पापा जी, राधिका, कमला बाई और प्रिंस बड़ी गाड़ी मे गए। मै ममता बाई कों लेकर बाइक पर गया।  वहाँ थावला मे परिवार वाले लोगो से मिला। पहरावनी मे मुझे चालीस रुपये और दो ड्रेस मिली।  मेनका जी और देव बेटा थावला ही रह गए, वो कल आएंगे। मेनका जी बहुत भाग दौड़ कर रही थी। दो मिनट बात कि तो मैंने कहा कि थोड़ा आराम कर ले, इतनी भागमभाग क्यों कर रही है। जिम्मेदारी मे भावुकता मिल जाती है, तो इसी तरह ताबड़तोड़ मेहनत होती है।  थावला मे आशाराम और उसकी फेमेली से भी मुलाक़ात हुईं, सुलझे हुए लोग है बहुत।  वापस आते समय बहुत सर्दी लगी, ममता बाई घर परिवार कि बातें करते हुए आ रही थी। जब हम नेगड़िया पुलिया पर आए तो हमने बहुत अद्धभुत दृश्य देखा।  पूर्व की तरफ चाँद की रौशनी नदी मे गिर रही थी। और पश्चिम मे ढलता हुआ सूरज अपनी अंतिम रौशनी से लालिमा बना रहा था। सूरज की रौशनी मे डार्क नेस थी, अजीब सा रहस्यमय वातावरण था। जबकि चाँद की ...

दिल्ली यात्रा

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इस साल तीन बार दिल्ली जाना हुआ। अभी छ तारीख कों इंदर भाई देवलेन और मै ट्रेन से दिल्ली गए. दीदी सुनीता बैंसला जी के बंगले पर जाना था हमें, यहाँ कर्नल बैंसला साहब की सुक्तियों पर आधारित किताब पर कुछ काम पेंडिंग था, इसी कारण हम दिल्ली गए थे। तीन दिन दिल्ली रहे, दीदी बहुत अच्छे से ख्याल रखती है. इस बार हम उनके ऑफिस भी जाकर आए. उनका ऑफिस जीवन से भरा हुआ है , ऑफिस के अंदर ही उन्होंने कोई पचास गमले रखे हुए है. सब के सब स्वस्थ और खिले हुए. ऐसा जीवंत ऑफिस मैंने कही नही देखा. अच्छी यात्रा रही.